कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शिक्षा के भविष्य को नई दिशा दे रही है, और इस महत्वपूर्ण परिवर्तन का हिस्सा बनना मेरे लिए सम्मान की बात है। Centre for NaMo Studies (CNMS), NCPUL एवं Media Centre द्वारा आयोजित AI Education Summit 2026 में विशिष्ट अतिथि (Special Guest) के रूप में आमंत्रित होने पर मैं आयोजकों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।
“AI for Education, AI in Education” विषय पर आयोजित यह शिखर सम्मेलन शिक्षा क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी प्रगति और भविष्य की संभावनाओं पर सार्थक चर्चा का एक उत्कृष्ट मंच साबित हुआ। देशभर से शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और युवा प्रतिभाओं ने इसमें भाग लेकर शिक्षा के बदलते स्वरूप पर अपने विचार साझा किए।
आज AI ने सीखने, पढ़ाने और ज्ञान तक पहुँचने के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। कुछ ही सेकंड में जानकारी उपलब्ध हो जाती है, जटिल समस्याओं के समाधान सामने आ जाते हैं और व्यक्तिगत सीखने (Personalized Learning) के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। निस्संदेह, यह तकनीक शिक्षा को अधिक प्रभावी, समावेशी और सुलभ बना रही है।
हालाँकि, हमें यह भी समझना होगा कि AI मानव बुद्धिमत्ता का विकल्प नहीं, बल्कि उसका सहयोगी है। मैंने अपने संबोधन में युवाओं से आग्रह किया कि वे AI का उपयोग करें, लेकिन उस पर पूर्णतः निर्भर न बनें। यदि हम अपनी सोचने, विश्लेषण करने और रचनात्मकता विकसित करने की क्षमता को कम कर देंगे, तो तकनीक हमारी शक्ति बनने के बजाय हमारी कमजोरी बन सकती है।
मेरे विद्यार्थी जीवन के दिनों में किसी जटिल प्रश्न या रासायनिक समीकरण को हल करने के लिए घंटों अध्ययन और अभ्यास करना पड़ता था। वही प्रक्रिया हमारे मस्तिष्क को विकसित करती थी। आज अधिकांश उत्तर कुछ ही क्षणों में उपलब्ध हो जाते हैं, लेकिन यह आवश्यक है कि हम स्वयं भी सोचने और समझने की आदत बनाए रखें। मेरा मानना है कि युवाओं को अपने मस्तिष्क का 90 प्रतिशत उपयोग स्वयं करना चाहिए और AI को केवल 10 प्रतिशत सहयोगी के रूप में अपनाना चाहिए।
शिक्षा केवल जानकारी प्राप्त करने का माध्यम नहीं है; यह व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और मानवीय संवेदनाओं का विकास भी करती है। AI ज्ञान प्रदान कर सकता है, लेकिन संस्कार, नैतिकता, सम्मान, करुणा और आध्यात्मिकता जैसे गुण केवल मानवीय अनुभवों और शिक्षकों के मार्गदर्शन से ही विकसित होते हैं।
भारत आज विश्व स्तर पर डिजिटल परिवर्तन और नवाचार का नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसी शिक्षा प्रणाली का निर्माण करें जो तकनीक-सक्षम होने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों पर आधारित हो। AI और मानवीय बुद्धिमत्ता का संतुलित समन्वय ही भविष्य की सफल शिक्षा का आधार बनेगा।
आइए, हम मिलकर ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करें जो तकनीक-सक्षम, समावेशी, मूल्य-आधारित और भविष्य के लिए तैयार हो। यही वह मार्ग है जो भारत को ज्ञान, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा।
– डॉ. बसंत गोयल
CEO & Founder, Goel Medicos
Chairman, Mission Sarvarth Sewa Foundation
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